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नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होने पर कà¥à¤¯à¤¾ करें? जानें लकà¥à¤·à¤£ और कारण
बचà¥à¤šà¤¾ जब से जनà¥à¤® लेता है, तब से उसे किसी ना किसा सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ का सामना करना पड़ सकता है। जिसमें से ‘कबà¥à¤œâ€™ à¤à¥€ à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ है। नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना बहà¥à¤¤ सामानà¥à¤¯ है। इसको अनदेखा करना कई बार बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत के लिठनà¥à¤•सानदायक हो सकती है। वैसे कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‡ और बड़ों दोनों में ही होना काफी आम होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब पेट खराब होता है, तो तबियत à¤à¥€ अजीब सी ही लगती है। इसके अलावा आपने सà¥à¤¨à¤¾ होगा कि पेट अनà¥à¤¯ कई बीमारियों का घर à¤à¥€ होता है। नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होने के कई कारण हो सकते हैं। छोटे बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ की सही जानकारी होने पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के कबà¥à¤œ का इलाज आसान बना देती है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होना कà¥à¤¯à¤¾ है?
“कबà¥à¤œ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ है, जिसमें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास या पॉटी करने की फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी में कमी आ जाती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग दिन में दो बार सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास करते हैं लेकिन, इसकी फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से लेकर बड़ों में अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर यदि बचà¥à¤šà¤¾ दो या इससे अधिक दिन तक पॉटी नहीं करता है तो उसे कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।â€
“बचà¥à¤šà¥‡ को पॉटी करने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है और इसके कारण से उसके पेट में à¤à¥€ दरà¥à¤¦ रहता है। इसके अलावा मां बेबी पूप कलर यानी कि बचà¥à¤šà¥‡ के पॉटी का रंग देख कर कबà¥à¤œ होने का पता लगा सकती है।â€
बचà¥à¤šà¤¾ दिन में कितनी बार पॉटी करता है?
बचà¥à¤šà¥‡ के उमà¥à¤° के हिसाब से उसके पॉटी करने की à¤à¤• फà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी होती है, जिसमें अगर कमी आती है तो बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। आइठजानते हैं कि बचà¥à¤šà¤¾ दिन में कितनी बार पॉटी करता है?
जनà¥à¤® से 3 महीने तक का बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• दिन में 3 से 6 बार पॉटी करता है।
3 से 6 महीने तक का बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• दिन 2 से 3 बार पॉटी करता है।
6 से 12 महीने तक का बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• दिन में 1 से 2 बार पॉटी करता है।
1 से 3 साल तक का बचà¥à¤šà¤¾ बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• दिन 1 से 2 बार पॉटी कर सकता है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है?
“नवजात शिशॠदिन में चार या पांच बार या हर बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग के बाद सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास करते हैं। यह सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होती है कि बचà¥à¤šà¥‡ का सà¥à¤Ÿà¥‚ल मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® से टाइट होना या पास करने में दिकà¥à¤•त होना कबà¥à¤œ का ही रूप है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° शिशà¥à¤“ं का सà¥à¤Ÿà¥‚ल हमेशा वॉटरी या मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® आता है। हालांकि, इसकी फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ हो सकती है। अगर छोटे बचà¥à¤šà¥‡ का चार या पांच दिन में पॉटी मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® आती है, तो उसे कबà¥à¤œ की दिकà¥à¤•त नहीं होती है। हालांकि, मां का दूध पीने पर शिशॠकी बॉडी अलग तरह से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देती है। वहीं, फॉरà¥à¤®à¥‚ला बेसà¥à¤¡ फूड जैसे फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤•, गाय का दूध देने पर शिशॠदिन में à¤à¤• बार या अगले दिन सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास कर सकता है। पाउडर वाले दूध का शिशॠकी बॉडी में अलग पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है, जिससे मां का दूध पीने पर सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास करने की फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी और फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• पीने पर पॉटी की फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हो सकती है।â€
कैसे पता करें कि आपके बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ है?
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ है ये बात तो बचà¥à¤šà¤¾ खà¥à¤¦ नहीं बताà¤à¤—ा। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ के शारीरिक गतिविधि और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर आप पता कर सकती हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ है या नहीं। आइठजानते हैं कि नवजात बचà¥à¤šà¥‡ में कबà¥à¤œ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं?
चार से पांच दिन बाद पॉटी करना
मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— करने में दिकà¥à¤•त होना
पॉटी करने की फà¥à¤°à¥€à¤•à¥à¤µà¥‡à¤‚सी में कमी आना
पॉटी का टाइट होना
कई बार सà¥à¤Ÿà¥‚ल पास करते वकà¥à¤¤ बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होना
बचà¥à¤šà¥‡ के पेट का टाइट होना या बचà¥à¤šà¥‡ का असहज महसूस करना
पॉटी ना करने पर या करने के दौरान बचà¥à¤šà¥‡ का लगातार रोना
बचà¥à¤šà¥‡ की पाॅटी छोटे कंकड़ की तरह कठोर होना
उपरोकà¥à¤¤ बताठगठलकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर कोई à¤à¥€ मां बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ है या नहीं ये समठसकती हैं। अगर फिर à¤à¥€ आपको बचà¥à¤šà¥‡ की समसà¥à¤¯à¤¾ समठमें ना आठतो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से तà¥à¤°à¤‚त संपरà¥à¤• करें।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होने का कारण कà¥à¤¯à¤¾ है?
“छह महीने तक शिशॠमां के दूध पर निरà¥à¤à¤° रहते हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पीना à¤à¥€ कबà¥à¤œ का à¤à¤• कारण होता है। छह महीने की अवधि पूरा करने के बाद शिशॠको अनà¥à¤¯ सॉलिड फूड या खाना ना खिलाने से कबà¥à¤œ हो सकता है। दूध में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® होता है, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे पोषक ततà¥à¤µ का अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में शिशॠकी बॉडी में जाने से पॉटी सखà¥à¤¤ हो जाता है।â€
“शिशॠकी बॉडी में पानी की कमी से पॉटी टाइट हो सकती है, जिससे कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा हो सकती है। इसके अलावा, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को डायट में फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ ना देने से à¤à¥€ कबà¥à¤œ हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में फाइबर होता है। फाइबर पॉटी को मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® बनाने का कारà¥à¤¯ करता है। इसके अलावा, अगर बचà¥à¤šà¤¾ बड़ा हो गया है और वह सिरà¥à¤« नॉनवेज डायट पर रहता है, तो à¤à¥€ कबà¥à¤œ हो सकता है।â€
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ के कबà¥à¤œ का निदान कैसे करें?
अगर नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ है, तो उसका निदान कर के इलाज करना बहà¥à¤¤ जरूरी है। इसके लिठआप अपने बचà¥à¤šà¥‡ को डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ को देख कर दवा दे देते हैं, लेकिन जब समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान फिर à¤à¥€ नहीं होता है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤› टेसà¥à¤Ÿ करते हैं। नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको निमà¥à¤¨ जांचें कराने की सलाह दे सकते हैं :
रेकà¥à¤Ÿà¤® की जांच
जब बचà¥à¤šà¤¾ तीन दिन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक अगर पॉटी नहीं करता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° रेकà¥à¤Ÿà¤® की जांच करते हैं। इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° हाथों में दसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥‡ पहन कर बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¤¨à¤¸ में उंगली के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रेकà¥à¤Ÿà¤® की जांच करते हैं।
à¤à¤•à¥à¤¸-रे
कई बार बचà¥à¤šà¥‡ को सही से पॉटी ना होने का कारण बड़ी आंत à¤à¥€ बन सकती है, à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ के पेट का à¤à¤•à¥à¤¸-रे कराते हैं और बड़ी आंत की जांच करते हैं।
बेरियम टेसà¥à¤Ÿ
बेरियम à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का रसायन है, जिसे बचà¥à¤šà¥‡ को पिलाया जाता है। इसके बाद बेरियम छोटी आंत, बड़ी आंत और मलाशय को कवर कर लेता है, जिससे à¤à¤•à¥à¤¸-रे में इन अंगों की सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ तसà¥à¤µà¥€à¤° मिलती है। जिससे नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है, इस बात का पता लगाया जा सकता है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ होने पर इलाज कैसे करें?
“शिशà¥à¤“ं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कबà¥à¤œ में लैकà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ नहीं दिया जाना चाहिà¤à¥¤ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ देने से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को डीहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ हो सकता है, जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डायरिया होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।’ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की डायट में वैरायटी लाकर कबà¥à¤œ का इलाज किया जा सकता है। दूध की मातà¥à¤°à¤¾ को सीमित करके फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दी जाà¤à¤‚।â€
उनके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• “बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ाकर और डायट में मोडिफिकेशन करना जरूरी है। इससे कबà¥à¤œ का इलाज किया जा सकता है।’ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि शिशॠके छह महीने की अवधि पूरा करने पर उसे दूध के अलावा दाल का पानी à¤à¥€ पिलाया जाना चाहिà¤à¥¤ यदि बचà¥à¤šà¥‡ को छह हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तक कबà¥à¤œ रहता है तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर लैकà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ दिया जा सकता है। कबà¥à¤œ का इलाज करने के लिठà¤à¤• लिठà¤à¤• वरà¥à¤· से ऊपर की आयॠके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को ही लैकà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ दिया जाता है।â€
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ का इलाज करने के लिठघर में à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¾ देना उचित नहीं होता। इंटेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ में दिकà¥à¤•त होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाना चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की डायट में वैरायटी लाने के लिठदूध के साथ अतिरिकà¥à¤¤ अलग-अलग पà¥à¤°à¤•ार की सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मिलाकर खिचड़ी, पराठा और थेपले दिठजा सकते हैं। साथ ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ डायट देकर कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ को दूर किया जा सकता है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ से कैसे बचाà¤à¤‚?
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ ना हो इसके लिठरोकथाम की जा सकती है, जिसके लिठआपको निमà¥à¤¨ बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना होगा:
जैसा कि कबà¥à¤œ à¤à¤• पेट संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो à¤à¤¸à¥‡ में मां और बचà¥à¤šà¥‡ के खानपान का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤ अगर मां सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करा रही है, तो उसे à¤à¤¸à¥€ चीजें खानी चाहिà¤, जिससे बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ ना हो। मां को हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और रंग बिरंगे फल खिलाना चाहिà¤à¥¤
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ से राहत दिलाने के लिठमां को फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सेवन करना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फाइबर का सेवन करने से पाचन तंतà¥à¤° अचà¥à¤›à¤¾ रहता है।
कई बार नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ कम दूध पीने के कारण à¤à¥€ होता है। इसके लिठमां को पूरा पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करना चाहिठकि अगर बचà¥à¤šà¤¾ कम दूध पीता है, तो उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ अधिक से अधिक बार कराà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‡ में कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ बार-बार नहीं बनेगी।
बचà¥à¤šà¥‡ को पॉटी कराते समय उसके सीटिंग पोजीशन पर à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें, कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कबà¥à¤œ की वजह गलत सीटिंग पोजिशन हो सकती है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‡ को कबà¥à¤œ से बचाव के लिठघरेलू उपाय कà¥à¤¯à¤¾ है?
6 महीने तक बचà¥à¤šà¥‡ सिरà¥à¤« मां का ही दूध पीते हैं। मां के दूध के अलावा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› à¤à¥€ खिलाने-पिलाने से डॉकà¥à¤Ÿà¤° सखà¥à¤¤ मना करते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में मां जो à¤à¥€ खाà¤à¤—ी उसका असर बचà¥à¤šà¥‡ पर à¤à¥€ होता है। इसलिठमां को à¤à¥€ अपने आहार पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¤ƒ
छोटे शिशॠसिरà¥à¤« मां का दूध पीते हैं, इसलिठजरूरी है कि मां अपनी डायट मेंहरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल और फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें।
शिशॠके शौच करने का à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ समय निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करें।
शिशॠको कà¤à¥€ à¤à¥€ à¤à¥‚खा न रखें और न ही उसे बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध पिलाà¤à¤‚। हर दो से तीन घंटे के बीच में बचà¥à¤šà¥‡ को थोड़ी-थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध पिलाà¤à¤‚ रहें।
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